बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर)
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बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर)

झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम करोड़ों शिवभक्तों की आस्था का महाकेंद्र है। विशेषकर सावन के महीने में यहाँ सुल्तानगंज से १०८ किलोमीटर पैदल चलकर गंगाजल लाने और बाबा पर अर्पित करने का कठिन 'कांवर यात्रा' नियम है।

किसने बनवाया / इतिहास

बाबा बैद्यनाथ मंदिर की स्थापना का इतिहास त्रेतायुग से जुड़ा है। पौराणिक कथा के अनुसार, लंकापति रावण ने हिमालय पर कठिन तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया और उन्हें लंका ले जाने के लिए शिवलिंग प्राप्त किया। भगवान शिव ने शर्त रखी कि रास्ते में इसे जहां भी भूमि पर रखा जाएगा, यह वहीं स्थापित हो जाएगा। देवराज इंद्र की माया के कारण रावण ने यहाँ शिवलिंग भूमि पर रख दिया और यह यहीं प्रतिष्ठित हो गया। वर्तमान भव्य मंदिर परिसर का जीर्णोद्धार 1596 में गिद्धौर राजवंश के राजा पूरणमल द्वारा कराया गया था।

वर्तमान धार्मिक मान्यता व महत्व

यह पावन धाम भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक होने के साथ-साथ ५१ पवित्र शक्तिपीठों में से भी एक (हृदय पीठ) है, जहाँ माता सती का हृदय गिरा था। पूरे विश्व में यह एकमात्र ऐसा तीर्थ है जहाँ शिव (ज्योतिर्लिंग) और शक्ति (शक्तिपीठ) एक साथ विराजमान हैं, जिसके प्रतीक स्वरूप दोनों शिखरों को लाल गठबंधन धागे से बांधा जाता है। वर्तमान में मान्यता है कि यहाँ 'कामना लिंग' की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है।

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बाबा बैद्यनाथ मुख्य मंदिर

गर्भगृह जहाँ रावण द्वारा स्थापित ऐतिहासिक और चमत्कारी कामना ज्योतिर्लिंग स्थित है।

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माता पार्वती मंदिर

मुख्य मंदिर परिसर के भीतर स्थित देवी पार्वती का मंदिर, जो लाल धागे से बाबा मंदिर से जुड़ा है।

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शिवगंगा सरोवर

मुख्य मंदिर के निकट स्थित पवित्र तालाब, जहाँ श्रद्धालु पूजन से पूर्व स्नान करते हैं।

नौलखा मंदिर

देवघर से १.५ किमी दूर स्थित एक अति सुंदर राधा-कृष्ण मंदिर, जिसे बनाने में ९ लाख रुपये लगे थे।

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तपोवन पहाड़

प्राकृतिक गुफाओं से घिरा शांत पर्वतीय क्षेत्र जहाँ ऋषि बालानंद ने तपस्या की थी।

सुबह 04:30 बजे

शिवगंगा स्नान व संकल्प

अपने दिन की शुरुआत पवित्र शिवगंगा तालाब में स्नान के साथ करें और बाबा के जलाभिषेक हेतु मन में संकल्प लें।

सुबह 05:30 बजे

मुख्य मंदिर में कतारबद्ध होना

पूजा सामग्री, बेलपत्र और जल लेकर मुख्य प्रवेश द्वार से कतार में लगें और मंदिर के दिव्य वातावरण का अनुभव करें।

सुबह 06:30 बजे

ज्योतिर्लिंग दर्शन व जलाभिषेक

गर्भगृह में प्रवेश कर स्वयंभू शिवलिंग का स्पर्श करें, गंगाजल अर्पित करें और धूप-दीप से बाबा बैद्यनाथ का ध्यान करें।

सुबह 09:30 बजे

गठबंधन दर्शन व परिसर परिक्रमा

बाहर आकर बाबा शिव और माता पार्वती के शिखरों के बीच बंधे गठबंधन लाल सूत्र के दर्शन करें और परिसर के अन्य २२ मंदिरों के दर्शन करें।

दोपहर 12:00 बजे

नौलखा मंदिर व तपोवन यात्रा

मंदिर से निकलकर सुंदर नौलखा मंदिर की नक्काशीदार वास्तुकला को देखें और शाम को तपोवन पहाड़ियों की गुफाओं में सनसेट का आनंद लें।

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