मथुरा वृंदावन
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मथुरा वृंदावन

यमुना किनारे बसी ब्रजभूमि मथुरा-वृंदावन का कण-कण राधा-कृष्ण के प्रेम और भक्ति से ओतप्रोत है। यहाँ की सुमधुर 'राधे-राधे' की गूंज और प्रसिद्ध पेड़ों (माखन-मिश्री) का स्वाद भक्तों को एक अलग ही लोक में ले जाता है।

किसने बनवाया / इतिहास

मथुरा भगवान श्री कृष्ण का जन्मस्थान है, जहाँ कंस के कारागार में उन्होंने अवतार लिया था। वृंदावन वह तपोभूमि और वन क्षेत्र है जहाँ उन्होंने अपनी बाल लीलाएं की थीं। यहाँ के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर की स्थापना संगीत सम्राट तानसेन के गुरु स्वामी हरिदास जी द्वारा की गई थी। उन्हें निधिवन के सघन कुंजों से बांके बिहारी जी की दिव्य प्रतिमा प्राप्त हुई थी, जिसे बाद में 1864 में आधुनिक मंदिर का स्वरूप देकर स्थापित किया गया।

वर्तमान धार्मिक मान्यता व महत्व

वृंदावन को भक्ति और प्रेम का साक्षात स्वरूप माना गया है। मान्यता है कि आज भी मध्यरात्रि के समय निधिवन के सघन वृक्ष गोपियाँ बन जाते हैं और भगवान श्री कृष्ण वहाँ राधा रानी के संग महारास रचाते हैं। वर्तमान मान्यता के अनुसार, बांके बिहारी जी के नयनों में लगातार देखने से भक्त उनकी भक्ति में खो जाता है, इसलिए मंदिर में बार-बार पर्दा (पट) गिराया और उठाया जाता है।

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श्री बांके बिहारी मंदिर

वृंदावन का सबसे प्रसिद्ध मंदिर जहाँ भगवान श्री कृष्ण त्रिभंग मुद्रा में विराजमान हैं।

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श्री कृष्ण जन्मस्थान (मथुरा)

वह ऐतिहासिक कारागार जहाँ भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था, अब एक भव्य मंदिर परिसर है।

प्रेम मंदिर

श्वेत संगमरमर से निर्मित भव्य मंदिर जहाँ राधा-कृष्ण की लीलाओं की अति सुंदर झांकियां हैं।

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निधिवन

अति रहस्यमयी और पवित्र वन क्षेत्र जहाँ रात में प्रवेश वर्जित है और रासलीला की मान्यता है।

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विश्राम घाट (मथुरा)

यमुना नदी का मुख्य घाट जहाँ कंस वध के बाद भगवान कृष्ण ने विश्राम किया था।

सुबह 07:30 बजे

यमुना विश्राम घाट और द्वारकाधीश

मथुरा के विश्राम घाट पर यमुना मैया को नमन करें और पास ही स्थित ऐतिहासिक द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन करें।

सुबह 09:30 बजे

श्री कृष्ण जन्मस्थान दर्शन

कृष्ण जन्मभूमि परिसर में जाएं, प्राचीन गर्भगृह (कारागार) के दर्शन करें और वहाँ की दिव्य ऊर्जा को महसूस करें।

दोपहर 12:30 बजे

वृंदावन आगमन व लंच

वृंदावन की ओर बढ़ें, यहाँ का प्रसिद्ध लस्सी, कचौड़ी और पेड़े का स्वाद लें और थोड़ी देर विश्राम करें।

शाम 04:00 बजे

बांके बिहारी जी व निधिवन दर्शन

बांके बिहारी मंदिर पहुंचकर ठाकुर जी की आरती व दर्शन करें, तत्पश्चात निधिवन के पवित्र कुंजों का भ्रमण करें।

शाम 06:30 बजे

प्रेम मंदिर लाइटिंग व फाउंटेन शो

शाम को प्रेम मंदिर पहुंचे, रंग-बिरंगी रोशनी में चमकते संगमरमर के दर्शन करें और संगीतमय फव्वारे (Musical Fountain) का आनंद लें।

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